| 'कहाँ गायब थे मंगरू?'-किसी ने चुपके से पूछा। |
| वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। |
| बताया काम अपने महकमे का तानकर सीना- |
| कि मक्खी हाँकता था सबके छोए के कनस्टर का। |
| सदा रखते हैं करके नोट सब प्रोग्राम मेरा भी, |
| कि कब सोया रहूंगा औ' कहाँ जलपान खाऊंगा। |
| कहाँ 'परमिट' बेचूंगा, कहाँ भाषण हमारा है, |
| कहाँ पर दीन-दुखियों के लिए आँसू बहाऊंगा। |
| 'सुना है जाँच होगी मामले की?' -पूछते हैं सब |
| ज़रा गम्भीर होकर, मुँह बनाकर बुदबुदाता हूँ! |
| मुझे मालूम हैं कुछ गुर निराले दाग धोने के, |
| 'अंहिसा लाउंड्री' में रोज़ मैं कपड़े धुलाता हूँ। |
| ('नई दिशा' के 9 अगस्त, 1949 के अंक में प्रकाशित) |
Saturday, June 18, 2011
मिनिस्टर मंगरू - फणीश्वर नाथ रेणु
गत मास का साहित्य!! - फणीश्वर नाथ रेणु
| गत माह, दो बड़े घाव |
| धरती पर हुए, हमने देखा |
| नक्षत्र खचित आकाश से |
| दो बड़े नक्षत्र झरे!! |
| रस के, रंग के-- दो बड़े बूंद |
| ढुलक-ढुलक गए। |
| कानन कुंतला पृथ्वी के दो पुष्प |
| गंधराज सूख गए!! |
| (हमारे चिर नवीन कवि, |
| हमारे नवीन विश्वकवि |
| दोनों एक ही रोग से |
| एक ही माह में- गए |
| आश्चर्य?) |
| तुमने देखा नहीं--सुना नहीं? |
| (भारत में) कानपुर की माटी-माँ, उस दिन |
| लोरी गा-गा कर अपने उस नटखट शिशु को |
| प्यार से सुला रही थी! |
| (रूस में)पिरिदेलकिना गाँव के |
| उस गिरजाघर के पास- |
| एक क्रास... एक मोमबत्ती |
| एक माँ... एक पुत्र... अपूर्व छवि |
| माँ-बेटे की! मिलन की!! ... तुमने देखी? |
| यह जो जीवन-भर उपेक्षित, अवहेलित |
| दमित द्मित्रि करमाज़व के |
| (अर्थात बरीस पस्तेरनाक; |
| अर्थात एक नवीन जयघोष |
| मानव का!)के अन्दर का कवि |
| क्रांतदर्शी-जनयिता, रचयिता |
| (...परिभू: स्वयंभू:...) |
| ले आया एक संवाद |
| आदित्य वर्ण अमृत-पुत्र का : |
| अमृत पर हमारा |
| है जन्मगत अधिकार! |
| तुमने सुना नहीं वह आनंद मंत्र? |
| [आश्चर्य! लाखों टन बर्फ़ के तले भी |
| धड़कता रहा मानव-शिशु का हृत-पिंड? |
| निरंध्र आकाश को छू-छू कर |
| एक गूंगी, गीत की कड़ी- मंडराती रही |
| और अंत में- समस्त सुर-संसार के साथ |
| गूँज उठी! |
| धन्य हम-- मानव!!] |
| बरीस |
| तुमने अपने समकालीन- अभागे |
| मित्रों से पूछा नहीं |
| कि आत्महत्या करके मरने से |
| बेहतर यह मृत्यु हुई या नहीं? |
| [बरीस |
| तुम्हारे आत्महंता मित्रों को |
| तुमने कितना प्यार किया है |
| यह हम जानते हैं!] |
| कल्पना कर सकता हूँ उन अभागे पाठकों की |
| जो एकांत में, मन-ही-मन अपने प्रिय कवि |
| को याद करते हैं- छिप-छिप कर रोते- अआँसू पोंछते हैं; |
| पुण्य बःऊमि रूस पर उन्हें गर्व है |
| जहाँ तुम अवतरे-उनके साथ |
| विश्वास करो, फिर कोई साधक |
| साइबेरिया में साधना करने का |
| व्रत ले रहा है। ...मंत्र गूँज रहा है!! |
| ...बाँस के पोर-पोर को छेदकर |
| फिर कोई चरवाहा बाँसुरी बजा रहा है। |
| कहीं कोई कुमारी माँ किसी अस्तबल के पास |
| चक्कर मार रही है-- देवशिशु को |
| जन्म देने के लिए! |
| संत परम्परा के कवि पंत |
| की साठवीं जन्मतिथि के अवसर पर |
| (कोई पतियावे या मारन धावे |
| मैंने सुना है, मैंने देखा है) |
| पस्तेरनाक ने एक पंक्ति लिख भेजी: |
| "पिंजड़े में बंद असहाय प्राणी मैं |
| सुन रहा हूँ शिकारियों की पगध्वनि... आवाज़! |
| किंतु वह दिन अत्यन्त निकट है |
| जब घृणित-क़दम-अश्लील पशुता पर |
| मंगल-कामना का जयघोष गूँजेगा |
| निकट है वह दिन... |
| हम उस अलौकिक के सामने |
| श्रद्धा मॆं प्रणत हैं।" |
| फिर नवीन ने ज्योति विहग से अनुरोध किया |
| "कवि तुम ऎसी तान सुनाओ!" |
| सौम्य-शांत-पंत मर्मांत में |
| स्तब्ध एक आह्वान..?? |
| हमें विश्वास है |
| गूँजेगा, |
| गूँजेगा!! |
अपने ज़िले की मिट्टी से - फणीश्वर नाथ रेणु
| कि अब तू हो गई मिट्टी सरहदी |
| इसी से हर सुबह कुछ पूछता हूँ |
| तुम्हारे पेड़ से, पत्तों से |
| दरिया औ' दयारों से |
| सुबह की ऊंघती-सी, मदभरी ठंडी हवा से |
| कि बोलो! रात तो गुज़री ख़ुशी से? |
| कि बोलो! डर नहीं तो है किसी का? |
| तुम्हारी सर्द आहों पर सशंकित |
| सदा एकांत में मैं सूंघता हूँ |
| उठाकर चंद ढेले |
| उठाकर धूल मुट्ठी-भर |
| कि मिट्टी जी रही है तो! |
| बला से जलजला आए |
| बवंडर-बिजलियाँ-तूफ़ाँ हज़ारों ज़ुल्म ढाएँ |
| अगर ज़िंदी रही तू |
| फिर न परवाह है किसी की |
| नहीं है सिर पे गोकि 'स्याह-टोपी' |
| नहीं हूँ 'प्राण-हिन्दू' तो हुआ क्या? |
| घुमाता हूँ नहीं मैं रोज़ डंडे-लाठियाँ तो! |
| सुनाता हूँ नहीं-- |
| गांधी-जवाहर, पूज्यजन को गालियाँ तो! |
| सिर्फ़ 'हिंदी' रहा मैं |
| सिर्फ़ ज़िंदी रही तू |
| और हमने सब किया अब तक! |
| सिर्फ़ दो-चार क़तरे 'ध्रुव' का ताज़ा लहू ही |
| बड़ी फ़िरकापरस्ती फ़ौज को भी रोक लेगा |
| कमीनी हरक़तों को रोक लेगा |
| कि अब तो हो गई मिट्टी सरहदी |
| (इसी से डर रहा हूँ!) |
| कि मिट्टी मर गई पंजाब की थी |
| शेरे-पंजाब के प्यारे वतन की |
| 'भगत' |
इमेर्जेंसी / फणीश्वर नाथ रेणु
| इस ब्लाक के मुख्य प्रवेश-द्वार के समने |
| हर मौसम आकर ठिठक जाता है |
| सड़क के उस पार |
| चुपचाप दोनों हाथ |
| बगल में दबाए |
| साँस रोके |
| ख़ामोश |
| इमली की शाखों पर हवा |
| 'ब्लाक' के अन्दर |
| एक ही ऋतु |
| हर 'वार्ड' में बारहों मास |
| हर रात रोती काली बिल्ली |
| हर दिन |
| प्रयोगशाला से बाहर फेंकी हुई |
| रक्तरंजित सुफ़ेद |
| खरगोश की लाश |
| 'ईथर' की गंध में |
| ऊंघती ज़िन्दगी |
| रोज़ का यह सवाल, 'कहिए! अब कैसे हैं?' |
| रोज़ का यह जवाब-- ठीक हूँ! सिर्फ़ कमज़ोरी |
| थोड़ी खाँसी और तनिक-सा... यहाँ पर... मीठा-मीठा दर्द! |
| इमर्जेंसी-वार्ड की ट्रालियाँ |
| हड़हड़-भड़भड़ करती |
| आपरेशन थियेटर से निकलती हैं- इमर्जेंसी! |
| सैलाइन और रक्त की |
| बोतलों में क़ैद ज़िन्दगी! |
| -रोग-मुक्त, किन्तु बेहोश काया में |
| बूंद-बूंद टपकती रहती है- इमर्जेंसी! |
| सहसा मुख्य द्वार पर ठिठके हुए मौसम |
| और तमाम चुपचाप हवाएँ |
| एक साथ |
| मुख और प्रसन्न शुभकामना के स्वर- इमर्जेंसी! |
| ('धर्मयुग'/ 26 जून, 1977 में पहली बार प्रकाशित) |
Friday, November 19, 2010
बिहार को मिला प्रगतिशील राज्य का सम्मान
पटना, जागरण ब्यूरो। नई दिल्ली में इंडिया टुडे द्वारा शुक्रवार को आयोजित स्टेट आफ स्टेट्स कार्यक्रम में तेजी से प्रगति कर रहे राज्य के तौर पर बिहार को सम्मानित किया गया। सूबे का चयन स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धि के आधार पर किया गया है। समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को सम्मान का प्रतीक चिह्न प्रदान किया।
प्रदेशों के चयन के लिए अर्थशास्त्री लवीश भंडारी और विवेक राय ने आधारभूत संरचना, निवेश का माहौल, कृषि, उपभोक्ता बाजार, प्राथमिक शिक्षा, प्रशासन तथा प्राथमिक स्वास्थ्य को मापदंड बनाया था। उसके आधार पर हुई विभिन्न राज्यों की रैंकिंग में बिहार को तेजी से प्रगति कर रहे राज्य के रूप में रेखांकित किया गया है।
श्री मोदी ने बताया कि कार्यक्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार की प्रगति को उल्लेखनीय बताया गया। यह टिप्पणी की गयी कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा में बढ़े सरकारी व्यय के परिणामस्वरूप राज्य में सामाजिक प्रक्षेत्र लाभान्वित हुआ है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, केरल के मुख्यमंत्री वी.एस.अच्यूतानंद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, हिमाचल के मुख्यमंत्री पीके धूमल व कई राज्यों के मंत्री उपस्थित थे।
source: jagran.yahoo.com
प्रदेशों के चयन के लिए अर्थशास्त्री लवीश भंडारी और विवेक राय ने आधारभूत संरचना, निवेश का माहौल, कृषि, उपभोक्ता बाजार, प्राथमिक शिक्षा, प्रशासन तथा प्राथमिक स्वास्थ्य को मापदंड बनाया था। उसके आधार पर हुई विभिन्न राज्यों की रैंकिंग में बिहार को तेजी से प्रगति कर रहे राज्य के रूप में रेखांकित किया गया है।
श्री मोदी ने बताया कि कार्यक्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बिहार की प्रगति को उल्लेखनीय बताया गया। यह टिप्पणी की गयी कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा में बढ़े सरकारी व्यय के परिणामस्वरूप राज्य में सामाजिक प्रक्षेत्र लाभान्वित हुआ है। इस मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, केरल के मुख्यमंत्री वी.एस.अच्यूतानंद, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, हिमाचल के मुख्यमंत्री पीके धूमल व कई राज्यों के मंत्री उपस्थित थे।
source: jagran.yahoo.com
Tuesday, December 1, 2009
समीकरण
रामसेवक के विधान सभा में टिकट भेटब तय अछि, ५० सालक मेहनत कायल छलैक, सब वर्ग में नीक पैठ छैक पूरा क्षत्र क s में ईहा एकटा एहेन उमीदवार अछि जाकर जीत लगभग तय छैक | दोसर पार्टी वाला सब बड़ प्रलोभन देलकैक जे हमरा पार्टी में चली आ हम पार्षद हम राज्य सभा सदस्य बना दैत छियैक मुदा टस से मस नहीं भेल अप्पन पार्टी के लेल निस्वार्थ सेवा करैत रहल जाकर परिणाम छैक जे आई जीताब लगभग तय छैक |
समाचार पत्र में जखन नामक घोषणा भेल ते रामसेवक के नाम नहीं रामगुलाम के नाम छलैक आहिरेबा! ई की भय गलैक रामगुलाम ते जेल में छैक ओकर साख ते क्षेत्र में बहुत ख़राब छैक तखन ओकरा टिकट कियाक भेटलैक | एतबे में रामुद्दीन बाजि उठल तु सब किछु नहीं बुझैत छिहिन रामगुलाम काल्हिये जेल स s छूटी के एलैक " ओही से की हेतैक ओकरा के वोट देतैक ओ कते के मर्डर केलक" फेर बेबकूफी वाला बात ओ सब केस में बड़ी भय गलैक एतय जाति समीकरण चलैत छैक ताहि द्वारे ओकरा टिकट देल गेल, संगही ओकरा सन दबंग नेता क्षेत्र में और के अछि
समाचार पत्र में जखन नामक घोषणा भेल ते रामसेवक के नाम नहीं रामगुलाम के नाम छलैक आहिरेबा! ई की भय गलैक रामगुलाम ते जेल में छैक ओकर साख ते क्षेत्र में बहुत ख़राब छैक तखन ओकरा टिकट कियाक भेटलैक | एतबे में रामुद्दीन बाजि उठल तु सब किछु नहीं बुझैत छिहिन रामगुलाम काल्हिये जेल स s छूटी के एलैक " ओही से की हेतैक ओकरा के वोट देतैक ओ कते के मर्डर केलक" फेर बेबकूफी वाला बात ओ सब केस में बड़ी भय गलैक एतय जाति समीकरण चलैत छैक ताहि द्वारे ओकरा टिकट देल गेल, संगही ओकरा सन दबंग नेता क्षेत्र में और के अछि
Monday, November 30, 2009
फार्मुला
बहुत दिनका बाद मंत्रीजी अप्पन क्षेत्र आबि रहल छलाह | शिक्षा मंत्री बनलाक बाद शायद पहिल बेर अप्पन गाम आ क्षेत्र जेवाक मोका भेटलैन, पहिने जखन विधायक छलाह तखन ते कहियो काल बाज़ार में दर्शन भs जायत छल मुदा आब ते दर्शन दुर्लभ भs गेल | बहुत बेलना बेललाक बाद मंत्री बनलाह | क्षेत्रक लोक के मन बहुत खुश भेलैक जे आब हमरो सबहक गाम में स्कूल खुजत, विकाश होयत |
मंत्रीजीक काफिला बहुत करीब १५-२० टा गाड़ी छल, मंत्रीजीक गाड़ी बिच में सजल धजल फूलक माला से लदल छल | ओही गाड़ी में मंत्रीजीक संग हुनकर सचिव सेहो बैसल छल, सबकियो आराम सs जा रहल छलैथ की गाड़ी एकाएक सड़क पर रुकी गेल | रोडक कात में किछु लोक हाथ में फुलक माला लs मंत्रीजीक जयकार कs रहल छल एक आदमीक हाथ में एकटा कागज पर आवेदन पत्र छल आ ओ आवेदन पत्र मंत्री जी देबय चाहैत छल ओकरा सबहक मांग छल जे हमरा गाम एकटा मिडिल स्कुल हेवाक चाही| कियाक ते अहि गाम में कोनो स्कुल नहीं अछि बगल के गाम में धारक ओही पार जे स्कुल छैल ओही में लड़का सब ते कुनु तरहे स्कुल चलि जायत अछि मुदा लड़की सब नहीं जा पबैत अछि | पुलिस वाला मंत्री जी सs मिलेवाक लेल तैयार नहीं छल जकर बिरोध केला पर ओकरा सब पर पुलिस डंडा बरसाबय लगलैक |
"अहाँ पुलिस के मना करियो आ आवेदन पत्र के मंजुर कs लियो अखन सरकार लग फंड छैक आ ओकर कहब छैक जे हरेक पंचायत में एकटा स्कुल हेवाक चाही" सचिव बाजी उठलाह, मंत्रीजी आँखी लाल पियर करैत बजलाह "अहाँ बेबकुफ के बेबकुफ रही गेलहु पढला लिखला से किछु नहीं होयत, हम मंत्री छि आ अहाँ हमरा सिख्बैत छी अहाँ के पता नहि अछि जे अखन वोट के तीन साल छैक अखन यदि मंजुर कs देबैक ते इलेक्शन में सब बिसरी जतेक ई सब काज वोट से छः महिना पहिने सुरू कायल जायत छैक"
मंत्रीजीक काफिला बहुत करीब १५-२० टा गाड़ी छल, मंत्रीजीक गाड़ी बिच में सजल धजल फूलक माला से लदल छल | ओही गाड़ी में मंत्रीजीक संग हुनकर सचिव सेहो बैसल छल, सबकियो आराम सs जा रहल छलैथ की गाड़ी एकाएक सड़क पर रुकी गेल | रोडक कात में किछु लोक हाथ में फुलक माला लs मंत्रीजीक जयकार कs रहल छल एक आदमीक हाथ में एकटा कागज पर आवेदन पत्र छल आ ओ आवेदन पत्र मंत्री जी देबय चाहैत छल ओकरा सबहक मांग छल जे हमरा गाम एकटा मिडिल स्कुल हेवाक चाही| कियाक ते अहि गाम में कोनो स्कुल नहीं अछि बगल के गाम में धारक ओही पार जे स्कुल छैल ओही में लड़का सब ते कुनु तरहे स्कुल चलि जायत अछि मुदा लड़की सब नहीं जा पबैत अछि | पुलिस वाला मंत्री जी सs मिलेवाक लेल तैयार नहीं छल जकर बिरोध केला पर ओकरा सब पर पुलिस डंडा बरसाबय लगलैक |
"अहाँ पुलिस के मना करियो आ आवेदन पत्र के मंजुर कs लियो अखन सरकार लग फंड छैक आ ओकर कहब छैक जे हरेक पंचायत में एकटा स्कुल हेवाक चाही" सचिव बाजी उठलाह, मंत्रीजी आँखी लाल पियर करैत बजलाह "अहाँ बेबकुफ के बेबकुफ रही गेलहु पढला लिखला से किछु नहीं होयत, हम मंत्री छि आ अहाँ हमरा सिख्बैत छी अहाँ के पता नहि अछि जे अखन वोट के तीन साल छैक अखन यदि मंजुर कs देबैक ते इलेक्शन में सब बिसरी जतेक ई सब काज वोट से छः महिना पहिने सुरू कायल जायत छैक"
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