Wednesday, September 23, 2009

ईक्कसवी सदीक फगुआ

ऋतु बसन्त के भेल प्रवेष
जाड़क नहि आब कोनो कलेष
मज्जर से गमकैत अछि आम
गाबै फगुआ सब बैस दलान
कियो मारै ढोल पर हाथ
किया दैत जोगिराक साथ
निकलैत जखन षिव के झांकी
बचैत नहि छल ककरो खांखी
मायक हाथक मलपुआक स्वाद
अबैत अखनो फगुआ मे याद
ब्रह्मस्थन में जमै छल टोली
भड़ल रहै छल भांगक झोली
भौजी हाथक रंग गुलाल
बजबैत जखन खुषीसॅ ’लाल’
सबकिया रंग में सराबोर
राग द्वेस सब भेल बिभोर
ईक्कसवी सदीक फगुआक हाल
केने अछि बड़ आई बबाल
नहि निकलैत आब रंगक झोली
एसएमएस से सब हैप्पी होली
आईटी में नव रंगक खेल
घरे से सब भेजैत ई-मेल
दु-चारि टा चित्र कट पेस्ट
नहि करैत छथि समय वेस्ट
नहि निकलैत भांगक डोल
दारू पी सब करै किलोल
बाजै सबतरि अस्लील सीडी
दुर भागै फगुआसॅ नव पीढी
आधुनिकताक दौर में हम
कयल महात्म फगुआक कम

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